Monday, April 11, 2011

बिकिनी जिंदाबाद~~~~बुर्का मुर्दाबाद~~~~~!!

फ्रांस खुद को सेक्यूलर राष्ट्र कहता है। यदि भारतीय संदर्भ में सेक्यूलर की परिभाषा देखी जाए तो किसी भी इंसान को अपना धर्म मानने और उसके रीति-रिवाजों के मुताबिक रहने की पूरी स्वतंत्रता है। अब पता नहीं ये बात फ्रांस में लागू होती है या नहीं। क्योंकि अब जो प्रस्ताव पास  हुआ है, उससे तो कम से कम यही कहा जा सकता है कि वहां धर्मनिरपेक्ष का मतलब इससे अलग हटकर है। फ्रांस एक विकसित देश है। सामाजिक पिछड़ापन के हिसाब से अब उसकी भारत जैसे देश से तुलना नहीं की जा सकती। फ्रांस आधुनिक युग का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में ये सोचने वाली बात है कि फ्रांस के आधुनिक लोग पुरातन की कैसे वकालत कर सकते हैं। जहां सारे आधुनिक देशों और समाज में इंसानों के शरीर से कपड़े उतर रहे हैं..ऐसे में अगर फ्रांस अपने देश की महिलाओं के शरीर से कपड़े उतरवाना चाहता है तो इसमें गलत क्या है। भले ही भारत जैसे देश में महिला के शरीर से कपड़ा उतरने का मतलब अश्लीलता और उत्तेजना फैलना वाला होता हो, लेकिन फ्रांस में ये समस्या नहीं है। फ्रांस के लोगों पर औरत के नंगे या अधनंगे होने से फर्क नहीं पड़ता। भारत में जरूर पड़ जाता है। फ्रांस कितना आधुनिक है इसका सबसे ताजा उदाहरण तो सरकोजी और उनकी बेगम कार्ला हैं। कइयों के साथ संबंध रखने वाली कार्ला आज सरकोज़ी की बीवी है। कार्ला मॉडल रह चुकी हैं। ऐसे में आप कल्पना कर सकते हैं कि उनके शरीर पर कितने कपड़े हो सकते हैं। अब बीवी का कुछ तो असर सरकोज़ी पर होगा ही। इस असर का निशाना बन गया मुस्लिम धर्म। जी हां फिलहाल फ्रांस में मुसलमानों का बुर्का निशाने पर है। फ्रांस में सार्वजनिक जगहों पर बुर्का पहनने वाली महिलाओं को  700 पाउंड यानी करीब 10,000/- हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा। यह जुर्माना उन मुस्लिम पुरुषों के लिए दोगुना हो जाएगा, जो अपनी पत्नियों या फिर घर की किसी महिला को बुर्का पहनने के लिए मजबूर करेंगे। दरअसल, फ्रांस में कानून लागू हो गया है. जिसके तहत सार्वजनिक जगहों पर बुर्का और नकाब पहनने पर जुर्माने का प्रस्ताव है। वैसे सरकोज़ी पहले ही कह चुके हैं कि बुर्का को बिल्कुल भी हटा दिया जाएगा क्योंकि इसकी वजह से फ्रांस जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में गैर-मुस्लिम नागरिक खुद को अलग महसूस करते हैं। चलिए धर्मनिरपेक्षता की आड़ में सरकोज़ी    इस्लाम और बुर्के पर निशाना साध रहे हैं।

मेरा  मकसद सिर्फ इतना है कि जनता को जो पसंद है उस परंपरा पर रोक लगाना उचित नहीं है।  कम से कम भारत जैसे देश में बुर्का  मुस्लिम महिलाओं का एक ऐसा सुरक्षा कवच तो जरूर है जिससे वे अपने आपको दुनिया की बुरी नज़र से बचा सकती हैं। हमारा मानना है कि महिलाओं को आधुनिक होना चाहिए, लेकिन देह दिखाकर नहीं, पढ़-लिखकर और अपने पैरों पर खड़ा होकर आधुनिक बनना चाहिए।

और बुर्के पर बहस अगर की जाए तो काफी लम्बी हो जायेगी...मगर बुर्के को ज़बरदस्ती पहनाना या ज़बरदस्ती उसको उतरवाना दोनों ही ठीक नहीं हैं, अभी अभी फेसबुक पर कहीं पढ़ा है की शिवसेना ने भी बुर्के पर बैन लगाने की वकालत की है..ठाकरे परिवार हमेशा से मुस्लिम विरोधी, यूपी, बिहार के लोगों को पीट कर और सस्ती लोकप्रियता पाने की कोशिश करता आ रहा है...मगर वोह भूल जाता है की केवल महाराष्ट्र ही पूरा भारत नहीं है.....निकल कर देख ...भारत क्या है....कितना बड़ा है...यूपी और बिहार जा कर देख कभी...अपनी गली में तो कुत्ता भी शेर होता है....देश का ठेका ठाकरे परिवार ने नहीं ले रखा है...यह हिंदुस्तान है....महाराष्ट्र नहीं ठाकरे जी...मन में लड्डू फोड़े जाओ...गली में बैठे भोंकते जाओ..मरने से पहले कुछ अन्ना हजारे से भी सीखते जाओ..जिसकी एक आवाज़ पर हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई, औरत, मर्द, जवान , बूढे सब जंतर मंतर को दौड़ गए थे...तुझे देखना था, तो वहां देखता, जंतर मंतर पर मोजूद था " पूरा हिंदुस्तान "   !!!

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